पूराणों में ऐसा आलेखा आता है कि एक बार भगवान शंकर ने आवेश में आकर सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा का सिर काट दिया था। लेकिन इसके पिछे की कहानी क्या आप जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि भगवान शंकर को ब्रह्मा का सिर  काटना पड़ा । इसके पिछे भी कई तर्क हैं । उन्हीं में सबसे ज्यादा वर्णित एक मत का हम जिक्र करते हैं

भगवान शंकर के एक स्वरूप भैरव ने काटा था ब्रह्मा का सिर

धर्म ग्रंथों के अनुसार भैरव भगवान शिव का ही एक अवतार हैं. भैरव के स्वभाव में क्रोध है, तामसिक भाव है. इस अवतार का मूल उद्देश्य सारी बुराईयों को समावेश करने के पश्चात भी अपने अंदर धर्म को स्थापित करना है. शिव पुराण में भगवान शंकर के इस रूप के संदर्भ में लिखा गया है कि एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु स्वयं को शकंर जी से श्रेष्ठ मानने लगे थे. इस विषय पर जब साधु-संतों से पूछा गया तो उन्होंने भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु की बात को नकार दिया. उसी वक़्त वहां भगवान शंकर प्रकट हुए और ब्रह्मा जी ने कहा कि “तुम मेरे पुत्र हो चद्रशेखर”, मेरी शरण में आओ. इतनी बात सुनने के बाद भगवान शंकर को क्रोध आ गया और उन्होंने वहीं कालभैरव का रूप धारण कर अपनी उंगली के नाख़ून से ब्रह्मा का सर काट दिया.