देश की राजनीति में वशंवाद की परंपरा की बेल बढ़ती ही जा रही है। अब इस कतार में कभी वशंवाद की मुखर विरोधी रही बसपा भी शामिल होने जा रही है। आज मेरठ में हुई एक सभा में मायावती ने राजनीतिक हुंकार के साथ बसपा की विरासत को संभालने वाले वारिस की झलक भी दिखाई। विरासत को संभालने वाला चेहरा मायावती के परिवार का ही है। देश की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बसपा सुप्रीमो ने इसके लिए अपने भतीजे को चुना है।

इस बात के संकेत तब मिले जब पार्टी प्रमुख मायावती ने मेरठ में हुई रैली में अपने भतीजे आकाश का औपचारिक परिचय करवाया। इसके साथ ही मायावती ने आकाश के पिता व अपने छोटे भाई आनन्द कुमार का भी परिचय करवाया। ऐसा पहली बार हुआ है जब मायावती ने पिता-पुत्र की इस जोड़ी का परिचय इस तरह खुले मंच से कराया हो। हालांकि मायावती ने आनंद की राजनीति में एंट्री को लेकर पहले ही संकेत दे दिया था। मायावती ने 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर अपने छोटे भाई आनंद कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित किया था। आकाश और उनके पिता के बारे में कहा जाता है कि वो लगातार लखनऊ व दिल्ली में हो रही पार्टी की बैठकों में हिस्सा लें रहे हैं।