नोएडा के चर्चित आरूषि हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए नूपुर तलवार और पति राजेश तलवार को बरी कर दिया है। बता दें कि सन 2013 में गाजियाबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने तलवार दंपति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ तलवार दंपति ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। जिस पर न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की पीठ ने दोपहर दो बजे अहम फैसला सुनाया।

इस मामले में आरोपी दंपती डा. राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआइ कोर्ट गाजियाबाद की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी। दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। अब गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए तलार दंपति को बरी कर दिया है।

मालूम हो कि डा. तलवार की नाबालिग पुत्री आरुषि की हत्या 15-16 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर 25 स्थित घर में ही कर दी गई थी। विवेचना के दौरान घर की छत पर उनके घरेलू नौकर हेमराज का शव भी पाया गया था। सीबीआइ ने सीधा सुबूत न मिलने के कारण क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन सीबीआइ कोर्ट ने उस पर संज्ञान लेते हुए तलवार दंपती के खिलाफ मुकदमा चलाया और उन्हें हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 26 नवंबर, 2013 को राजेश और नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इससे एक दिन पहले इनको दोषी ठहराया गया था। आरुषि इनकी बेटी थी। राजेश और नुपुर फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे हैं।

न्यायमूर्ति बी के नारायण और न्यायमूर्ति एके मिश्रा की खंडपीठ ने तलवार दंपति की अपील पर सात सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और फैसला सुनाने की तारीख 12 अक्तूबर को तय की थी। मई, 2008 में नोएडा के जलवायु विहार इलाके में 14 साल की आरुषि का शव उसके मकान में बरामद हुआ था। शुरुआत में शक की सुई हेमराज की ओर गई, लेकिन दो दिन बाद मकान की छत से उसका भी शव बरामद किया गया। उत्तर प्रदेश की तत्काल मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।