चेन्नई: भारतीय स्टेट बैंकों में सहायक बैंकों के विलय के बाद से ज्यादातर यूनियनों की सदस्य संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टॉफ फेडरेशन (एआईएसबीआईएसएफ) के एक शीर्ष नेता ने यह जानकारी दी है। एआईएसबीआईएसएफ के महासचिव संजीव कुमार बंदलिश ने बताया, विलय के बाद सहयोगी बैंकों के एआईबीईए के करीब 28,000 सदस्य हमारे यूनियन में शामिल हुए हैं। इससे पहले हमारे यूनियन की सदस्य संख्या 1,70,000 थी। अब हमें उम्मीद है कि यह बढ़कर 2,00,000 हो गई होगी।

बंदलिश नेशनल कनफेडरेशन ऑफ बैंक इंप्लाई (एनसीबीई) के महासचिव भी हैं। बंदलिश के मुताबिक, करीब 40,000 अवार्ड स्टॉफ (क्लास 3 और 4 के कर्मी) सहयोगी बैंकों से एसबीआई में शामिल हुए हैं।

एसबीआई में शामिल होने वाले बैंक हैं – स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद। एआईएसबीआईएसएफ एसबीआई की सबसे बड़ी यूनियन है। वहीं, एआईबीईए के भी एसबीआई में बड़ी संख्या में सदस्य हैं।

बंदलिश ने कहा, विलय के बाद एसबीआई में एआईबीईए के करीब 40,000 कर्मी आए, जिसमें से 28,000 कर्मी हमारे यूनियन से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि यूनियन के साथ बड़ी संख्या में सदस्यों का जुड़ना कोई नई बात नहीं है और न ही इसमें कोई चुनौती है।

उन्होंने कहा, एसबीआई बड़ी संख्या में लोगों की भर्तियां करता है और वे हमारे साथ भी जुड़ते हैं और अन्य यूनियनों के साथ भी जुड़ते हैं। इसमें कोई टकराव जैसी बात नहीं है, क्योंकि सभी पढ़े-लिखे लोग हैं और अपना फैसला खुद लेते हैं।वहीं, दूसरी तरफ एआईबीईए के महासचिव सी. एच. वेंकटचलम ने बंदलिश के दावे को बढ़चढ़कर कहा हुआ बताया।

वेंकटचलम ने कहा, यह सही है कि सहयोगी बैंकों से एसबीआई में आए एआईबीईए के सदस्य एआईएसबीआईएसएफ में शामिल हुए हैं। लेकिन यह संख्या इतनी बड़ी नहीं है। यह कोई बड़ी बात नहीं है। हमारे कई सदस्य हमारे पास दोबारा लौट के आते हैं।

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